कौशांबी। सिराथू तहसील के बम्हरौली गांव का अखाड़ा इन दिनों युवा पहलवानों की मेहनत और अनुशासन का केंद्र बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान रामकिशन (अर्जुन तिवारी) के मार्गदर्शन में प्रतिदिन 70 से 80 खिलाड़ी यहां कुश्ती का अभ्यास कर रहे हैं। ग्रामीण परिवेश में संचालित यह अखाड़ा नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का सपना संजोए हुए है।
रामकिशन का परिवार पिछले छह पीढ़ियों से पहलवानी की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
वर्ष 2024 में कजाकिस्तान में आयोजित वर्ल्ड नोमैड गेम्स में 100 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीतने के बाद उनका यह अखाड़ा युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। यहां सुबह और शाम नियमित रूप से दांव-पेंच, शारीरिक व्यायाम और पारंपरिक कुश्ती का प्रशिक्षण दिया जाता है।
पहलवान रामकिशन अब तक 6 बार स्टेट चैंपियन, 7 बार मंडल केसरी और 2 बार नेशनल चैंपियन रह चुके हैं। उनका कहना है कि यदि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन मिले तो बम्हरौली का यह अखाड़ा भविष्य में देश को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहलवान दे सकता है।
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